जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर से सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो महिलाओं के पैर काटे जाने के बाद पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहा है।
परिजनों के अनुसार, सड़क दुर्घटना के बाद दोनों महिलाओं को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका दावा है कि भर्ती के समय स्थिति इतनी गंभीर नहीं थी, लेकिन इलाज के दौरान हालत बिगड़ती गई और अंततः उनके पैर काटने पड़े।
परिवार ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समय पर उचित उपचार नहीं मिला, जिससे संक्रमण बढ़ गया। हालांकि, इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस मामले को लेकर अब एक और बड़ा सवाल उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ निजी अस्पतालों पर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के चलते सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती।
👉 हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
फिलहाल प्रशासन ने जांच के संकेत दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है?












